Ayanamsa Vimarsha (अयनांशविमर्शः)
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Prof. Sacchidanand Mishra - Sanskrit & Hindi - Bharatiya Vidya Sansthan
Ayanamsa Vimarsha (अयनांशविमर्शः)
अयनांशविमर्शः (Ayanamsa Vimarsha) अयनांश विमर्श ज्योतिष का वह बिन्दु है, जिस पर कलम उठाना कठिन कार्य है। ज्योतिष की दीर्घकालीन परम्परा में प्रस्तुत ग्रन्थ अयन चलन तथा अयनांश के समस्त भ्रमों का सरल संस्कृत भाषा में ऐसा समाधान है, कि इसे आद्योपान्त पढ़कर संस्कृत के छात्र तथा गणित सिद्धान्त ज्योतिष के छात्र तथा अन्वेषक समस्त भ्रमों से मुक्त हो जायेंगे।
नक्षत्रपुञ्ज निरयण है तथा सौरमण्डल सायन है। इन दोनों के समन्वय के बिना नहीं तो ज्योतिष संहितोक्त प्रभावों की संगति लग सकती है, नहीं ग्रहण, उदयास्त आदि प्रत्यक्षदृश्य घटनाओं के साथ न्याय सम्भव है। अचलवत् प्रतीयमान नक्षत्रों से सौर मण्डलीय सम्बन्ध का ज्ञान अयनांश से होता है। इसमें अयनांश के सभी पक्षों पर गहन विमर्श के बाद शुद्ध भारतीय वैदिक पद्धति को लाने की चेष्टा की गयी है। शून्यनांशवर्ष का भेद हो या आरम्भ स्थान का भेद। सभी पक्ष इसकी समीक्षा के अन्तर्गत हैं।
Author : Prof. Sacchidanand Mishra
Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan
Language : Sanskrit & Hindi
Edition : 1st 2010
Pages : 382
Cover : Hard Cover
ISBN : 81-87415-92-4
Size : 14 x 3 x 21 ( l x w x h )
Weight : 590gm
Item Code : BVS 0010
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